🏆 उपलब्धि अनलॉक!
आपने एक मॉड्यूल पूर्ण किया है!

📚 रैदास के पद

अध्याय 6

Reprint 2025-26

0%
📖 मॉड्यूल: 0/6 ⭐ स्कोर: 0 ⏱️ समय: 0:00

🌟 "रैदास के पद" में आपका स्वागत है

हिंदी साहित्य में रैदास के पद अपनी सादगी और गहरी आध्यात्मिकता के लिए जाने जाते हैं। संत रैदास निर्गुण भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने अपने जीवन और रचनाओं से समाज में प्रचलित जाति-पांति के भेदभाव का विरोध किया।

इस इंटरैक्टिव पाठ में हम रैदास के जीवन, उनकी भाषा और पदों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। उनके पदों के माध्यम से उनके मूल विचारों और संदेशों को समझेंगे, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

📝 पाठ प्रवेश

मध्ययुगीन साधकों में रैदास का विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के कवियों में गिने जाते हैं। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में रैदास का जरा भी विश्वास न था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं और आपसी भाईचारे की ही सच्चा धर्म मानते थे।

रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रैदास को उपमा और रूपक अलंकार विशेष प्रिय रहे हैं। सीधे-सादे पदों में संत कवि ने हृदय के भाव बड़ी सफ़ाई से प्रकट किए हैं। इनका आत्मनिवेदन, दैन्य भाव और सहज पाठक के हृदय को उद्वेलित करते हैं।

यहाँ रैदास के दो पद लिए गए हैं। पहले पद में 'प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी' में कवि अपने आराध्य को याद करते हुए उनसे अपना तुलना करता है। उसका प्रभु बाहर कहीं मंदिर या मस्जिद में नहीं विराजता वरन् उसके अपने अंतर में सदा विद्यमान रहता है। यही नहीं, वह हर हाल में, हर काल में उससे श्रेष्ठ और सर्वगुण संपन्न है। इसलिए तो कवि को उन जैसा बनने की प्रेरणा मिलती है।

गतिविधि: पद पर चिंतन

रैदास के पदों के महत्व पर विचार कीजिए। आपके अनुसार, रैदास के विचारों की आज के समय में क्या प्रासंगिकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।

अपने विचार चुनिए:

कविता

प्रश्न अभ्यास

📚 भाषा अध्ययन

रैदास के पदों में प्रयुक्त शब्दों के प्रचलित रूप जानिए:

रैदास की भाषा में भाषाओं का मिश्रण है।

रैदास को अलंकार विशेष प्रिय थे।

रैदास भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि थे।

रैदास के पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ 'गुरुग्रंथ साहब' में भी सम्मिलित हैं।

रैदास का जन्म में हुआ था।

📝 शब्दों के प्रचलित रूप

पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए:

मोरा का प्रचलित रूप है:

चंद का प्रचलित रूप है:

बाती का प्रचलित रूप है:

जोति का प्रचलित रूप है:

बरै का प्रचलित रूप है:

राती का प्रचलित रूप है:

छत्रु का प्रचलित रूप है:

कउ का प्रचलित रूप है:

🎯 गतिविधियाँ

🎧 श्रवण गतिविधि

रैदास के जीवन के बारे में सुनिए और नोट्स बनाइए। फिर पहले बॉक्स में अपने नोट्स और दूसरे बॉक्स में एक कथात्मक विवरण लिखिए।

रैदास के जीवन के महत्वपूर्ण तथ्य (सही विकल्प चुनें):

1. रैदास का जन्म किस वर्ष हुआ था?
2. सिकंदर लोदी ने रैदास को कहाँ आने का निमंत्रण भेजा था?
3. रैदास के पद किस धर्मग्रंथ में शामिल हैं?

रैदास के विचारों का वर्णन (एक विकल्प चुनें):

📢 वाचन गतिविधि

रैदास के निम्नलिखित पद पर विचार कीजिए:

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।
प्रभु जी, तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सुहागा।
प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करे रैदासा।।

इस पद का अर्थ अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए। आपके विचार से रैदास ने ईश्वर और भक्त के संबंध को किस प्रकार दर्शाया है? अपने विचार अपने साथी से साझा कीजिए।

✍️ विचार-चयन गतिविधि

रैदास के पदों में व्यक्त विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर निम्नलिखित विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें। निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर अपना उत्तर चुनें:

  • सामाजिक समानता
  • आध्यात्मिक विचार
  • मानवीय मूल्य
  • भक्ति का महत्व

रैदास के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता (एक विकल्प चुनें)

📚 क्या आप जानते हैं?

रैदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने उन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। रैदास को सिर्फ निर्गुण संत कवि ही नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। उनके अनुयायियों ने "रैदासी" नामक एक पंथ की स्थापना की, जो आज भी विद्यमान है।

मीराबाई ने रैदास को अपना गुरु माना था। मीराबाई की कविताओं में कई स्थानों पर रैदास का उल्लेख मिलता है। रैदास की भक्ति भावना और आध्यात्मिक विचारों का मीराबाई पर गहरा प्रभाव था।