अध्याय 6
Reprint 2025-26
हिंदी साहित्य में रैदास के पद अपनी सादगी और गहरी आध्यात्मिकता के लिए जाने जाते हैं। संत रैदास निर्गुण भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने अपने जीवन और रचनाओं से समाज में प्रचलित जाति-पांति के भेदभाव का विरोध किया।
इस इंटरैक्टिव पाठ में हम रैदास के जीवन, उनकी भाषा और पदों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। उनके पदों के माध्यम से उनके मूल विचारों और संदेशों को समझेंगे, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
मध्ययुगीन साधकों में रैदास का विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के कवियों में गिने जाते हैं। मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा जैसे दिखावों में रैदास का जरा भी विश्वास न था। वह व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं और आपसी भाईचारे की ही सच्चा धर्म मानते थे।
रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। रैदास को उपमा और रूपक अलंकार विशेष प्रिय रहे हैं। सीधे-सादे पदों में संत कवि ने हृदय के भाव बड़ी सफ़ाई से प्रकट किए हैं। इनका आत्मनिवेदन, दैन्य भाव और सहज पाठक के हृदय को उद्वेलित करते हैं।
यहाँ रैदास के दो पद लिए गए हैं। पहले पद में 'प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी' में कवि अपने आराध्य को याद करते हुए उनसे अपना तुलना करता है। उसका प्रभु बाहर कहीं मंदिर या मस्जिद में नहीं विराजता वरन् उसके अपने अंतर में सदा विद्यमान रहता है। यही नहीं, वह हर हाल में, हर काल में उससे श्रेष्ठ और सर्वगुण संपन्न है। इसलिए तो कवि को उन जैसा बनने की प्रेरणा मिलती है।
रैदास के पदों के महत्व पर विचार कीजिए। आपके अनुसार, रैदास के विचारों की आज के समय में क्या प्रासंगिकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
रैदास के पदों में प्रयुक्त शब्दों के प्रचलित रूप जानिए:
रैदास की भाषा में भाषाओं का मिश्रण है।
रैदास को अलंकार विशेष प्रिय थे।
रैदास भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि थे।
रैदास के पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ 'गुरुग्रंथ साहब' में भी सम्मिलित हैं।
रैदास का जन्म में हुआ था।
पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए:
मोरा का प्रचलित रूप है:
चंद का प्रचलित रूप है:
बाती का प्रचलित रूप है:
जोति का प्रचलित रूप है:
बरै का प्रचलित रूप है:
राती का प्रचलित रूप है:
छत्रु का प्रचलित रूप है:
कउ का प्रचलित रूप है:
रैदास के जीवन के बारे में सुनिए और नोट्स बनाइए। फिर पहले बॉक्स में अपने नोट्स और दूसरे बॉक्स में एक कथात्मक विवरण लिखिए।
रैदास के निम्नलिखित पद पर विचार कीजिए:
इस पद का अर्थ अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए। आपके विचार से रैदास ने ईश्वर और भक्त के संबंध को किस प्रकार दर्शाया है? अपने विचार अपने साथी से साझा कीजिए।
रैदास के पदों में व्यक्त विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर निम्नलिखित विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें। निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर अपना उत्तर चुनें:
रैदास की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने उन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। रैदास को सिर्फ निर्गुण संत कवि ही नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। उनके अनुयायियों ने "रैदासी" नामक एक पंथ की स्थापना की, जो आज भी विद्यमान है।
मीराबाई ने रैदास को अपना गुरु माना था। मीराबाई की कविताओं में कई स्थानों पर रैदास का उल्लेख मिलता है। रैदास की भक्ति भावना और आध्यात्मिक विचारों का मीराबाई पर गहरा प्रभाव था।